मध्य प्रदेश के मजबूरो का काल बना लॉक डाउन ?

May 8, 2020

 

वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगभग विश्व भर में सर्वप्रथम लॉकडाउन का ही सहारा लिया गया, परन्तु भारत जो विश्व गुरु बनाने को अग्रसर है वही यह मजदूरों ? (या कहे मज़बूरो)  के लिए काल साबित होता जा रहा है। लगभग 15 मार्च तक केंद्रीय मंत्रालय के हिसाब से कोरोना महामारी नहीं होने की खबर थी वही 22 को जनता कर्फ्यू तो उसके बाद ताबड़ तोड़ लॉकडाउन के चलते शहरों में रोजगार छीनने के बाद पाई-पाई के लिए मोहताज मजदूर जो अब अपने घर वापस लौट रहे है उनके असमय काल के गाल में समाने की तस्वीरें और खबरें लगातार सामने आ रही है।

 

बीते सवेरे महाराष्ट्र के औरंगाबाद से दर्दनाक खबर सामने आई, जहां 16 मजदूर मालगाड़ी के चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। मरने वाले सभी मजूदर मध्यप्रदेश से शहडोल और उमारिया के रहने वाले बताए जा रहे है। यह वही मध्य प्रदेश है जहा सियासत के चलते कोरोना की तुलना सीएम शिवराज सर्दी , बुखार से कर रहे थे तो वही सरकार गिराने के पहले "कोरोना" को "कांग्रेस का डोरोना" कह कर सम्बोधित कर रहे थे.  अब उन्ही की सरकार के चलते हज़ारो मज़दूरों को घर पंहुचा चुके सम्बंधित बड़े बड़े दावों के बीच हादसे के शिकार हुए सभी मज़बूर लॉकडाउन के चलते रोजगार छीनने के बाद बच्चो-परिवार सहित पैदल ही वापस घर की ओर लौट रहे थे।

 

पैदल लौट रहे मजदूर अल सुबह जब थक हार कर आराम करने के लिए ट्रेन की पटरियों पर लेट गए थे तभी मालगाड़ी इनको रौंदते हुए आगे निकल गई। हादसा इतना भीषण था कि मजदूरों के शरीर के परखच्चे 200 मीटर तक उड़ गए,जिसके चलते अब इनकी पहचान में मुश्किलें आ रही है।

 

औरंगाबाद हादसे ने शिवराज सरकार के सिस्टम पर भी एक काली स्याही पोत दी है। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी प्रवासी मजदूर धीरेंद्र का आरोप हैं कि उन्होंने एक हफ्ते पहले उमरिया में ई- पास के लिए अप्लाई किया था लेकिन अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हादसे के चश्मदीद धीरेंद्र ने घटना के अनुसार वह गुरुवार शाम 7 बजे अपने सथियों के साथ पैदल ही गांव जाने के लिए लिए निकले थे। सुबह 4 बजे उनके कुछ साथी जो आगे चल रहे थे थक हारकर आराम करने के लिए पटरी पर बैठ गए तभी उनको झपकी आ गई और मालगाड़ी उनको रौंदते हुए निकल गई। मज़बूरो का लॉकडाउन में रोजगार छीनने के बाद उनके अपने परिवार को पालने में दिक्कत हो रही थी इसके बाद सथियों के साथ वह अपने गांव जाने के लिए निकले थे।

 

हालत के सताए मजबूर पटरियों पर सोए थे क्योकि उनको लगा की लॉकडाउन ने रेल गाड़ियों के पहिये भी रोक रखे होंगे, परन्तु थकान के कारन लगी नींद उन मज़बूरो की अंतिम नींद साबित हुई।  अभी चंद  दिवस पूर्व उत्तरप्रदेश के मथुरा में मध्यप्रदेश के छतरपुर के 6 मजदूरों को बेकाबू ट्रक ने रौंद डाला था। यह सभी मजदूर भी वापस मध्यप्रदेश लौट रहे थे तभी मौत के मुंह में समा गए। इतना ही नहीं देश में लॉकडाउन के बाद जिस पहले प्रवासी मजदूर की मौत की खबर सामने आई थी वह भी मध्यप्रदेश से ही जुड़ा था। लॉकडाउन के तुरंत बाद 27 मार्च को दिल्ली से मध्यप्रदेश के मुरैना के लिए पैदल निकले 38 साल के रणवीर की आगरा में मौत हो गई थी। लगातार पैदल चलने के कारण रणवीर के सीने में तेज दुर्द हुआ और वह कुछ ही देर में अपनी प्राण गंवा बैठे।

 

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार भले ही अब तक एक लाख से अधिक मजदूरों की वापसी का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत से इससे बहुत दूर है। अब भी हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए है।

औरंगाबाद हादसे के बाद सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।  मध्य प्रदेश सरकार ने क्या इन प्रवासी मजदूरों का पंजीयन किया था। यदि किया था तो उन्हें वापस लाने का किया इंतजाम किया गया। वहीं इस पूरे हादसे को लेकर अब लॉकडाउन को लेकर मोदी सरकार भी कठघरे में आ गई है। 

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