जयपुर : चिलम ने बना दी कोरोना वायरस की चेन

April 27, 2020

 जहाँ एक ओर महामारी से लड़ने के लिए देश में लगातार प्रयास हो रहे है। लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की जा रही है लेकिन उसके बाद भी कुछ लोगों की लापरवाही कई लोगों की जान आफत में आ रही है। ताज़ा मामला जयपुर शहर का है शहर पहले ही देश के बड़े शहरों में बीमारों की संख्या को लेकर बदनाम हो चुका है। उसके बाद भी लोग संभलने को तैयार नहीं हैं। खुद की लापरवाही के कारण इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में सरकार और मेडिकल विभाग से उम्मीद लगाना व्यर्थ साबित हो रहा है। 

 

ट्रांसपोर्ट नगर थाना इलाके में स्थित एक प्राचीन मंदिर में कुछ समय से सात साधु रह रहे थे। वहां उन्होंने मंदिर में पूजा पाठ करने के साथ ही बीस से ज्यादा गाय भी रखी और उनकी देखभाल करने लगे। पॉश कॉलोनी में स्थित इस मंदिर के आसपास रहने वाले लोग मंदिर में पूजा करने आते तो गायों के लिए चारा भी लेकर आने लगे। उसके बाद साधु मंदिर से ही गायों का दूध भी बेचने लगे। आसपास रहने वाले पचास से भी ज्यादा परिवार दूध के नियमित ग्राहक हो गए। पिछले कुछ महीनों से यही सब चल रहा था और सही तरह से चल रहा था। लेकिन इस सप्ताह बड़ा धमाका हो गया मंदिर में रहने वाले एक साधु की चिलम पीने की आदत ने ही पूरी चेन बना दी। ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे पर कुछ लोगों के साथा चिलम पीने वाले साधु के कारण मंदिर में रहने वाले अन्य साधुओं की भी परेशानी बढ़ गई। दरअसल चिलम पीने वाले साधु की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद हंगामा मच गया मंदिर में रहने वाले सभी साधुओं को क्वारेंटाइन सेंटर भेजा गया। पास ही स्थित हनुमान जी के एक अन्य मंदिर में रहने वाले तीस लोगों के परिवार को भी बगरु में क्वारेंटाइन किया गया। 

 

निगम ने मंदिर में रहने वाली गायों को वहां से हटाया और गौशाला भेजा वहां से दूध लेने वाले और चारा डालने वाले करीब पचास परिवारों के तीन सौ लोगों की जानकारी जुटाई गई और उनके बाद उन सभी को होम क्वारेंटाइन कर दिया गया है। मंदिर को भी आगामी आदेशों तक बंद कर दिया गया है। स्थानीय निवासी नरेश अग्रवाल ने बताया कि कभी नहीं सोचा था कि दूध लेने और चारा खिलाने से भी कोई परेशानी हो सकती है।  सेठी कॉलोनी स्थित राधा बल्लभ जी के मंदिर में जो हुआ उससे चार गुना ज्यादा हालात गलता गेट स्थित एक बड़े मंदिर की है। दिल्ली रोड पर स्थित गलता गेट पर एक बड़े मंदिर में करीब सत्तर से ज्यादा साधु रहते हैं। मंदिर में ही गायें भी रहती हैं और साथ ही आसपास रहने वाले लोगों की गायें भी सवेरे यहीं चारा खाती हैं।  यहां चारा बेचने वाले दो लोग करीब एक हजार से भी ज्यादा चारे के गट्ठर बेच देते हैं। सवेरे पांच बजे से सात बजे के दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोग इनसे चारा लेते हैं और यह चारा गायों को खिलाया जाता है। इन्हीं गायों का दूध भी दुहा जाता है। बड़ी बात ये है कि यह इलाका महा कर्फ्यू क्षेत्र में आता है। उसके बाद भी पुलिस और प्रशासन का कोई इंतजाम यहां नहीं है।

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