मुंबई में 20 साल में टूटा बारिश का रिकॉर्ड , एक दिन में बरसा 298MM पानी

August 30, 2017

 

मुंबई में मंगलवार को 298 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. 1997 के बाद इस साल अगस्त में एक दिन में दर्ज की गई यह सबसे ज्यादा बारिश है. ये आंकड़ा मुंबई के सांताक्रूज मौसम केंद्र ने बताया है. आंकड़ों के अनुसार इससे पहले 23 अगस्त 1997 में 346.2 मिमी बारिश दर्ज की गई थी.मुंबई में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार ‘‘मंगलवार को भारी बारिश हुई. बुधवार को भी बारिश होने की संभावना है जो दोपहर बाद तक धीमी पड़ सकती है. लोग हैरान हैं क्योंकि मुंबई में आमतौर पर जून और जुलाई में भारी बारिश होती है.” हालांकि बुधवार सुबह मौसम विभाग के डीडीजी ने बताया कि बादल छंट गए हैं इस वजह से कुछ घंटे बारिश नहीं होगी, दोपहर बाद बारिश हो सकती है.मुंबई में भारी बारिश के कारण रेल सेवाओं के साथ यातायात भी प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से यात्री परेशान हुए हैं और उन्होने इसके लिए प्रशासन को उचित समय पर कदम न उठाने के लिए दोषी बताया है.

 

उपनगर अंधेरी में काम करने वाले मोइज उदयपुरवाला ने कहा कि दोपहर में ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं, जिसके कारण उनके पास अपने घर जाने के लिए कोई माध्यम नहीं बचा क्योंकि सड़कों पर भारी जाम के कारण यातायात बाधित था.

 

'पानी पर तैर रहे थे शव, 2005 की तबाही याद कर आज भी कांप जाती है रूह'

 

देश की आर्थिक राजधानी में हो रही लगातार बारिश और समुद्र से उठ रही ऊंची लहरों के बीच मर्चेंट नेवी अधिकारी कैप्टन शिवराज माने के दिलो दिमाग पर 26 जुलाई, 2005 की वह दुखद यादें कौंध जाती हैं. जब कुदरत के कहर ने इस मायानगरी को श्‍मशान बना दिया था.आज से करीब 12 साल पहले इसी दिन बादलों से बरसी आफत ने करीब 500 लोगों की जान ले ली थी. कुछ पानी से बचने के लिए गाड़ियों में मर गए, कुछ को बिजली का करंट लगा तो कुछ गिरती दीवारों के नीचे दब गए या डूब गए. उस एक दिन में मुंबई में 94 सेंटीमीटर बारिश हुई थी.नौसेना में होने के कारण उनको पानी की आदत थी लेकिन निश्चित तौर पर उस दिन वह ऐसे हालात के लिए तैयार नहीं थे. उनका कहना था कि उन दिनों के बारे में सोचकर आज भी उनकी रूह कांप जाती है और तेज बारिश उन्हें अनिष्ट की आशंका से डरा देती है.उन्होंने बताया कि बिना सुरक्षा गियर के जलमग्न इलाके में वह एक भैंस पर चढ़कर आगे बढ़े और उन्होंने इस दौरान शवों को पानी में तैरते हुए देखा. दिमाग में कैद ये तस्वीरें आज भी उनको परेशान कर देती हैं. 31 वर्षीय अधिकारी ने कहा कि शहर में उस समय मौजूद अधिकतर लोगों को आज भी वह दिन याद है.माने ने बताया, 'कुछ आधिकारिक कार्यों के सिलसिले में उस दिन मैंने अंबरनाथ से नेरूल (नवी मुंबई) के लिए सुबह की लोकल ट्रेन ली तो मॉनसून के अन्य दिनों की तरह ही मुंबई और ठाणे में बारिश हो रही थी.' दोपहर तक उनका काम खत्म हो गया और वह करीब ढाई घंटे में घर पहुंच जाते लेकिन उनको ढाई दिन लग गए. उन्होंने कहा, 'मेरे पास पहले से बहुत काम था, इसलिए मुझे इस बात का अहसास नहीं था कि बाहर क्या हो रहा है. मुझे यह बाद में महसूस हुआ. मैंने हार्बर लाइन पर नेरूल रेलवे स्टेशन से ट्रेन ली लेकिन वह तिलकनगर तक ही गई, जबकि मुझे कुर्ला से ट्रेन बदलना था.' वह जब अन्य यात्रियों के साथ पैदल चलकर कुर्ला पहुंचे तो उनको तबाही का असली मंजर देखने को मिला. रेलवे पटरी और प्लेटफार्म जलमग्न हो गए थे. वह किसी तरह ढाई दिन में अपने घर पहुंचे और इसे वह अपने जीवन का सबसे कठिन समय बताते हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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