ईएनसी की पदस्थापना पर दो करोड़ किसने लिये मेहदेले ने या पीए ने ?

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में यूँ तो स्थानान्तरण के समय हर वर्ष कलेक्टरी पाने वाले अधिकारियों से एक करोड़ तक का लेनदेन की चर्चा समाचार पत्रों में सुर्खियों में रही है लेकिन यह लेनदेन किसके इशारे पर होता और यह किसके पास जाता है इस खोज में हर कोई लगा रहता है, लेकिन हाल ही में कुसुम मेहदेले के विभाग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी में तबादलों को लेकर जो लेनदेन हुआ, उसके कारण स्टाफ का झगड़ा सड़क पर आ गया, मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो मुख्यमंत्री ने कुसुम मेहदेले को पूरा स्टाफ बदलने की सलाह दे दी लेकिन इतने भर से इस मामले की इतिश्री नहीं हो जाती लोगों में हाल ही में दो करोड़ रुपए देकर विभाग प्रमुख का पद पाने और उसके बाद विभाग में तबादलों में लेनदेन को लेकर जो अफरा-तफरी मची उसके बाद अब विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से लेकर हर कोई दबी जुबान से यह मांग करता नजर आ रहा है कि जैसा कि मुख्यमंत्री आगामी दिनों में कभी भी मंत्रीमण्डल का विस्तार कर सकते हैं और जैसे संकेत मिल रहे हैं कि इस मंत्रीमण्डल विस्तार में कुसुम मेहदेले को मुख्यमंत्री बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं तो कुसुम मेहदेले को बाहर का रास्ता दिखाने से पूर्व इस बात की भी जांच कराई जानी चाहिए कि हाल ही में विभाग के एएनसी के पद प्राप्त करने के लिये जो दो करोड़ का लेनदेन होने की चर्चा विभाग में जोरों पर है उसकी जांच करा लेना चाहिए कि आखिर यह इतनी बड़ी राशि किसने ली मंत्री के चहेते पीए राजपूत या मंत्री या कुसुम मेहदेले के पास गई। इससे यह स्थिति साफ हो जाएगी कि कुसुम मेहदेले जो अपने आपको पाक-साफ होने का दावा करती हैं आखिर इस लेनदेन में दोषी कौन है उनका पीए राजपूत या स्वयं मंत्री कुसुम मेहदेले, हालांकि ईएनसी की पदस्थापना को लेकर हुए इस दो करोड़ के लेनदेन के पीछे कौन जिम्मेदार है। इन विभागीय अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि यदि कुसुम मेहदेले को मंत्री पद से हटा दिया गया तो यह पूरा मामला दफन होकर रह जाएगा और इस बात का खुलासा नहीं हो पाएगा कि मुख्यमंत्री की बिना सहमति के हुई इस पदस्थापना में लेनदेन किसने किया। जैसा कि विभाग में चर्चा का दौर जारी है हाल ही में विभाग में हुई ईएनसी की पदस्थापना की फाइल मुख्यंत्री तक नहीं पहुंची और इस फाइल को कुसुम मेहदेले और उनके पीए राजपूत द्वारा ही निपटा दिया गया, हालांकि इस तरह के फाइलों के निपटारे के साथ ही यह चर्चा भी जोरों पर है कि यह पद दो करोड़ रुपये देकर हासिल किया गया और इस मामले में भेदभाव की नीति अपनाई गई जिसके चलते ईएनसी के पद के लिये जो अन्य तीन लोग शामिल थे उनकी योग्यता को भी दो करोड़ रुपये के लेनदेन की वजह से दरकिनार कर दिया गया और शायद इसीलिये सीनियरटी का भी ख्याल नहीं गया। खैर, जो भी हो फिलहाल तो विभाग में इस बात को लेकर असंतोष व्याप्त है कि रुपयों की खनक के चलते कुसुम मेहदेले या उनके पीए द्वारा दो करोड़ का लेनदेन कर ईएनसी का पद की बिना मुख्यमंत्री की सहमति के इस मामले को निपटा दिया गया, जबकि विभाग में यह चर्चा जोरों पर है कि ईएनसी की पद की नियुक्ति के लिये मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी है लेकिन दो करोड़ के लेनदेन के चलते मुख्यमंत्री को भी इससे दूर रखा गया। विभाग प्रमुख के लिये चली १५ दिनी उठापटक के बाद आखिरकार यह सौदा दो करोड़ में पटा और जिसने दो करोड़ रुपये दिये उसने यह पद हासिल किया, इस सबके जांच की मांग विभाग के अधिकारी दबी जुबान से करते नजर आ रहे हैं और साथ ही यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि जब दो करोड़ रुपये देकर इस विभाग प्रमुख का पद प्राप्त करने वाला व्यक्ति पद प्राप्त करते ही जो विभागीय स्थानान्तरण में अफरा-तफरी का खेल चला उस दो करोड़ रुपये की वापसी का ही सिलसिला अभी से जारी हो गया है यह तो शुरूआत है आगे क्या होगा, इसका तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है, लेकिन दो करोड़ देकर विभाग प्रमुख का पद प्राप्त करने वाले और कुसुम मेहदेले के पीए राजपूत के द्वारा विभागीय स्थानान्तरण में जो भजकलदारम् का दौर चला और यह स्थानान्तरण के लेनदेन का रायता मंत्री के अन्य स्टाफ की लड़ाई के चलते सड़क पर बिखर गया कुल मिलाकर इस समय विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे मामले की जांच कराये जाने की मांग करते नजर आ रहे हैं और इन लोगों का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री को कुसुम मेहदेले की मंत्रीमण्डल से विदाई से पहले इस बात की जांच करा लेना चाहिए कि क्या सच में ईएनसी की पदस्थापना में दो करोड़ का लेनदेन हुआ है और साथ ही विभागीय स्थानान्तरण में जो भजकलदारम् का दौर चला हालांकि इस स्थानान्तरण के दौर में हुए स्थानान्तरण की भी जांच कराये जाने की मांग विभागीय अधिकारियों द्वारा उठाई जा रही है।

                                      मुख्यमंत्री को भी अपनी सरकार की छवि को जो बट्टा कुसुम मेहदेले के पीए राजपूत और ईएनसी के सांठगांठ से जो स्थानान्तरण को लेकर बवाल मचा उसकी जांच करा लेनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि क्या सच में ईएनसी का पद पाने के लिये दो करोड़ का लेनदेन हुआ है और यदि हुआ है तो यह राशि मंत्री तक पहुंची या उनके पीए राजपूत तक ही रह गई, हालांकि राजपूत की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह केक सवाल उठ रहे हैं तो लोग यह कहते भी नजर आ रहे हैं कि राजपूत ने कुसुम मेहदेले के यहाँ रहते हुए जिस प्रकार का लक्ष्मी दर्शन का खेल खेला वह भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और रीतियों के अनुरूप है। राजपूत का तो केवल एक ही ध्येय था। भजकलदारम् और भजकलदारम् की इस लत के चलते उन्होंने राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी प्रमुख की पदस्थापना पर दो करोड़ का लेनदेन तक कर डाला जो शायद मध्यप्रदेश के इतिहास में किसी विभाग प्रमुख के पद के लिये ली जाने वाली राशि से कहीं अधिक है। कुल मिलाकर इस लेनदेन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नेता इस पूरे मामले की मुख्यमंत्री से जांच कराये जाने की अपील करते नजर आ रहे हैं। यदि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले की जांच करा लें तो यह भी साफ हो जाएगा कि इस लेनदेन के चलते विभाग प्रमुख की पदस्थापना के मामले को मुख्यमंत्री को पैसे के लेनदेन के चलते दूर रखा गया विभागीय सूत्रों पर यदि भरोसा करें तो विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों का यह भी कहना है कि विभाग प्रमुख की पदस्थापना की फाइल मुख्यमंत्री तक नहीं भेजी गई और उसका सारा निपटारा राजपूत ने मंत्री मेहदेेले से मिलकर कर दिया और इसके पीछे दो करोड़ के लेनदेन की चर्चाएं विभाग में लोग चटकारे लेकर चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं। देखना अब यह है कि विभाग प्रमुख के लिए हुए इस तरह के दो करोड़ के लेनदेन की जांच मुख्यमंत्री कराते हैं कि नहीं या यह परम्परा अब प्रदेश के अन्य विभागों के प्रमुखों के लिये यह राशि तय मानी जाएगी।

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